Read this article in English: Tycoon Baba & The Temple Thieves

हाल ही में, आम भारतीय जब तमिलनाडु में विरोध कर रहे थे, वेदांता रिसोर्सेज के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल से मुलाकात करते हुए उनके लंदन स्तिथ घर में बाबा रामदेव ने वक्तव्य दिया:

“अंतर्राष्ट्रीय साजिशकर्ताओं ने भोले बाले स्थानीय लोगों को उकसा कर उनके माध्यम से भारत के दक्षिण में वेदांता के विरुद्ध उपद्रव करवया । उद्योग देश के विकास के मंदिर हैं। उन्हें बंद नहीं किया जाना चाहिए।”

वेदांता के समर्थन में यह टिप्पणी अत्यधिक संदिग्ध एवं खोखली है। बाबा रामदेव क्यों, चर्च के स्वामित्व वाली विश्व की सबसे घृणित ब्रिटिश कंपनी वेदांता के लिए वकालत कर रहें हैं? यह वही कम्पनी हैं जो तमिलनाडु में स्टरलाइट विरोध के दौरान आम भारतीयों को इजरायली प्रशिक्षित पुलिस के माध्यम से आतंकित कर रही हैं एवं जबरन भारतीय खनिज संसाधनों का अधिग्रहण कर रही है।

क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में मंगला तेल क्षेत्र में सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों की तुलना में भी अधिक तेल है? और क्या आप यह भी जानते हैं कि भारतीय लोगों की इस निधि को ब्रिटिश पेट्रोलियम ने वेदांता का इस्तेमाल करके हड़प लिया है? क्या बाबा रामदेव यह नहीं जानते थे कि इंग्लैंड के चर्च ने वेदांता में अपने हिस्से को क्यों बेच दिया? क्यों बाबा इस बारे में अनभिज्ञ हैं कि यह कम्पनी एक चर्च प्रायोजित षड्यंत्र है? वेदांता का मालिक कौन है? इस रहस्य में बाबा की रुचि क्यों नहीं है? इस कंपनी की कार्रवाई के कारण 13 भारतीयों ने अपनी जान गंवाई फिर भी  बाबा इस तरह की ब्रिटिश राजकीय स्वामित्व वाली कंपनी का समर्थन क्यों कर रहें हैं?

दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) अपनाया जाने के केवल 9 महीने के पश्चात्, वेदांता दिवालिया इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को खरीद रहा था। क्या भारत का कोई भी प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री इन दो घटनाओं के प्रभावों को समझा सकता है? जब वेदांता खुद आर्थिक तंगी एवं दिवालिया होने के साथ संघर्ष कर रहा था, ऐसी स्तिधि में इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स की अर्थिक सहायता करने के लिए पैसे वेदांता को कहाँ से मिले?

इसी प्रकार, पिछले साल हमारे तथाकथित ‘राष्ट्रवादी’ नेता लंदन में अपनी रानी के पास जा पहुचे जहाँ उन्होने क्राउन कोम्पनिया वेदांता और फोर्साइट ग्रूप के माध्यम से गंगामा को साफ करने के लिए रानी से आग्रह किया। बिल्कुल ऐसे ही क्राउन फर्म डीलारु को दीवालिया होने से बचाया गया था नॉटबंडी करके, जो आज भी भारतीय मुद्रा छापति है। ग्रेटगैमइंडिया द्वारा उजागर किए जाने पर डीलारु उस समय सरकारी अधिकारियों द्वारा भी संरक्षित की गयी थी और उन्होंने सलाहकार फर्म ब्रंसविक के माध्यम से मुकदमे के साथ हमें धमकी देने की भी कोशिश की थी। इसके बजाए, इस बात को लेकर कोई दिक्कत नहीं हुई कि भारतीय मुद्रा नोटों को प्रिंट करने के लिए घटिया कागजात उपलब्ध कराने के लिए डीलारु के खिलाफ 11 करोड़ रुपये का मामला चल रहा है

यहां पर असली सवाल ये है की ब्रिटिश क्राउन कंपनियों के लिए इस अंधेरे आकर्षण के पीछे क्या कारण है, जबकि ये भारत को आपकी नज़रों के सामने लूट रही है? इसका एक कारण शायद यह हो सकता है कि स्कॉटलैंड में स्थित एक अनिवासी भारतीय जोड़ेने रामदेव के साम्राज्य को वित्त पोषित किया था, यहां तक ​​कि उन्हें एक द्वीप भी दिया और जो पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड में 12.46 लाख शेयर रखे, जिससे उन्हें दूसरा सबसे बड़ा हितधारक बना दिया गया। सुब्रमण्यम स्वामी ने एक अन्य भाग उजागर करते हुए यह संकेत दिया कि “ब्रिटिश इंटेलिजेंस के पास वेदांता इंक द्वारा आपूर्ति की गई महिलाओं की टेप हैं”।


लेकिन मामला इससे काफ़ी गहरा है। इस तरह के परिष्कृत कॉर्पोरेट व्यक्तित्व और ‘वेदांता’ जैसे सांस्कृतिक रूप से भावुक नाम की नींव के तहत, ये कंपनियां हमारे मठ-मंदिरों के संसाधनों के दोहन में भी शामिल हैं। क्या बाबा जानते हैं कि क्राउन फर्म वेदांता ने जिसकी वह वकालत कर रहे हैं, एंग्लो अमेरिकन कंपनी को हमारे मठ-मंदिरों के लूटे हुए माल से दीवालिया होने से बचाया? यह वही कंपनी है जो की ईस्ट इंडिया कंपनी की डी बियर्स कंपनी की मालिक है, जो वर्तमान में अपने सिंडिकेट द्वारा तिरुमाला तिरुपति की प्राचीन वस्तुओं और मंदिर-मूर्तियों की तस्करी और नीलामी में शामिल है। अब भला बाबा का इन मंदिर के लूटेरों से क्या वास्ता? कुछ तो मजबूरियाँ उनकी भी रही होंगी।

कोई कृपया बाबा को बताए कि यह तस्करी वाली भारतीय प्राचीन वस्तुएं और मूर्तियों को विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश नीलामी घरों क्रिस्टी और सोथबी मैं बेचा जा रहा है जिसकी स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों द्वारा की गयी थी। और हाल ही में पिछले महीने तिरुमाला मंदिर से एक गुलाबी हीरा की नीलामी सोथबी, जिनेवा में की गई थी। यूनाइटेड किंगडम में बाबा का एक बड़ा प्रशंसक वर्ग है, हम उससे आग्रह करेंगे कि वह कुछ प्रकाश डालें और अपने अनुयायियों को हमारी विरासत की तस्करी में शामिल इन ब्रिटिश फर्मों के बारे में जागरूक करे।

हिंदी अनुवाद – मनु दत्ता, B. Tech, IIT मद्रास, हिमाचल प्रदेश से, जो वित्तीय सॉफ्टवेयर डोमेन में काम कर रहे हैं

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GGI News Staff
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