Read this article in English: Putin Warns India Against Threat To Its Sovereignty

भारतीय प्रधानमंत्री ने हाल ही मे रूस मे 21वी सेंट पीट्सबर्ग अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक फोरम के विस्तृत सत्र मे हिस्सा लिया था| सत्र के दौरान मेजबान NBC के मेगन केली द्वारा US के राष्ट्रपति चुनाव मे रूस के दखल देने के सवाल पूंछने पर रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने, US इंटेलीजेंस कम्यूनिटी के बारे मे बोलने के अलावा, कुछ पल रुके और इस अवसर का उपयोग दुनिया के तमाम देशो मे सम्प्रभुता के स्तर पर बोलने मे किया|

“पूरी दुनिया मे ज्यादा देश नही हैं जो सम्प्रभु हैं| मै ये कहकर किसी की भावना नही आहत करना चाहता कि… सम्प्रभुता सीमित है| और मिलिट्री समझौते के साथ तो ये आफिसियली सीमित है| उनका समझौता हर प्रतिबंध का विवरण देता है| और व्यावहारिकता मे तो ये प्रतिबंध और ज्यादा सख्त होता है, जिसकी अनुमति हो उसके अलावा किसी और चीज की इजाजत नही होती, और कौन इसकी अनुमति देता है, वो नेता (जो बहुत दूर बैठे हैं)? इसलिये वैश्विक स्तर पर ज्यादा देश नही हैं जो सम्प्रभु हैं| और हम अपनी सम्प्रभुता की हिफाजत करते रहे हैं क्योंकि हम सम्प्रभु हैं| हम मूर्खतापूर्ण तरीके से इसे एंज्वाय कर सकते हैं पर सम्प्रभुता की जरुरत हमारे हितो की रक्षा के लिये जरूरी है, ये कोई खिलौना नही बल्कि हमे अपने विकास के लिये इसकी जरूरत है|”

और फिर, पुतिन अपने बगल मे बैठे भारतीय प्रधानमंत्री की तरफ सीधे मुखातिब हुये और उन्हे भारतीय सम्प्रभुता पर मंडरा रहे खतरे पर सीधे सम्बोधित करने लगे|

“भारत की अपनी सम्प्रभुता है| ये उनके पास है और इस पर उनका अधिकार है| और मै माननीय भारतीय प्रधानमंत्री जी से कहूंगा, हालांकि कल रात हम डिनर पर एकांत मे थे और हमारे बीच लम्बी बातचीत मे भी ये मैने कभी नही कहा था पर अभी मै कहूंगा कि हम इंडिया को ऐसी स्थिति मे, जो किसी और के लिये तो लाभकारी होगी पर भारतीय लोगो (और रूस के भी) के लिये लाभकारी नही होगी ऐसी तमाम कोशिशो के संदर्भ मे हम भारतीय प्रधानमंत्री और उनकी लीडरशिप और उनके देश की स्थिति जानते हैं| भारत को, जिसकी नींव उसकी सम्प्रभुता, नेतृत्व के चरित्र और राष्ट्रीय हितो मे है ऐसे गलत रास्ते पर नही जाना चाहिये और ना ही ऐसे लोगो की सलाह पर ध्यान देना चाहिये| परंतु दुनिया मे भारत जैसे कुछ ही देश हैं और हमे ये ध्यान रखना चाहिये| भारत उनमे से एक है, चाइना का भी उदाहरण दिया जा सकता है, कुछ और भी देश हैं पर ज्यादा नही| और दूसरो को गाइड करने के ऐसे प्रयास, अपनी इच्छा देश के भीतर या बाहर के किसी व्यक्ति के ऊपर थोपना जारी रहा तो ये अंतर्राष्ट्रीय मामलो के लिये घातक होगा और मै अपने बात के अंत मे कहना चाहूंगा कि जल्द ही इसका अंत होगा|”

India in Cognitive Dissonance Book

पुतिन ने जो ये गम्भीर मुद्दा उठाया उसे रूस के विदेश मंत्री सर्गई लावरोव ने सेंट पीट्सबर्ग अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक फोरम के 2 हफ्ते बाद मास्को मे हुई एशिया और अफ्रीकी देशो की एकता और सहयोग पर एक कमेटी मीटिंग के दौरान और स्पष्ट किया| कांफ्रेंस के दौरान लावरोव ने जोर दिया कि “रूस ने परम्परागत तौर पर एशिया और अफ्रीकी देशो की सम्प्रभुता की आकांक्षाओ को समर्थन दिया है, और उल्लेख किया कि ‘अपना भविष्य अपने हाथो खुद तय करने की चाहत जोर पकड रही है’”|

रूस के मंत्री ने आगे कहा कि “ये स्थिति उपनिवेशीकरण के खिलाफ संघर्ष के दिनो मे भी परिलक्षित हुई थी| ये दुबारा से स्वतः परिलक्षित हो रही है| हम जानते हैं कि हमारे कई पश्चिमी मित्र देश निजी एकपक्षीय हल के लिये इन क्षेत्रो को भौगोलिक राजनीतिक विवाद के क्षेत्र मे बदलने की कोशिश कर रहे हैं| वो अपने तरीको को दूसरो के आंतरिक समस्याओ मे थोपने की कोशिश कर रहे हैं| हम जानते हैं कि वित्तीय, आर्थिक, और कई अन्य परिस्थितियो को ध्यान मे रखते हुये इसका प्रतिरोध कर पाना कितना मुश्किल है| और फिर भी, हम देखते हैं कि अपने भविष्य तय करने का अधिकार अपने हाथ मे रखने की इच्छा बलवती हो रही है| हम पूरी शक्ति से इसका समर्थन करते हैं, रूस कई वर्षों से इसी रुख का पालन करता रहा है|”

“हमे खुशी है कि हमारे सभी देश, रूस, एशिया, अफ्रीका के सभी देश, और लैटिन अमेरिका के ज्यादातर देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थक हैं| और हमारे सभी देशो ने यूएन जनरल सभा द्वारा पिछले दिसम्बर मे पारित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावो का समर्थन किया है| इन प्रस्तावो का लक्ष्य और अधिक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था के बनने को प्रोत्साहन देना है| जिन आधारभूत सिद्धांतो का हमारा देश पालन करता है वो उसब इसमे दृष्टिगोचर होते हैं| ये प्रस्ताव सम्प्रभु देशो के आंतरिक मामलो मे दखल को रोकते हैं| ये राष्ट्रो के अपना भविष्य खुद तय करने के अधिकार के सम्मान के महत्व को भी दर्शाता है| इसके अतिरिक्त, ये किसी सैनिक कब्जे, या अपने राष्ट के कानून थोपकर और अपने क्षेत्रीय सीमाओ का उल्लंघन कर सत्ता परिवर्तन की किसी कोशिश की सम्भावना से इनकार करता है|”

“वो देश जिन्होने अंतर्राष्ट्रीय मामलो मे कई सदी तक इसकी आवाज उठाई है वो इस भूमिका को छोडने को तैयार नही हैं, हालांकि सोद्देश्य वो ये अब और उस तरह कर भी नही सकते जैसा उन्होने पूर्व मे किया है| परंतु हम और मै जानते हैं कि आपका देश भी उस मुकाम पर है, हम अपने राष्ट्रहित की हिफाजत किसी को नुकसान की कीमत पर नही करते| हमारा इरादा बिलकुल साफ है. ये हर कोई समझ सकता है, और हम अंतर्राष्ट्रीय मामलो मे सर्वसम्मति चाहते हैं|”

रूस के राष्ट्रपति और उनके विदेश मंत्री जो संकेत कर रहे हैं वो है भारत का झुकाव और निकटता, एक अध्ययन के अनुसार, वैश्विक कार्पोरेट नियंत्रण का नेटवर्क जिसे वैश्विक कुलीनतंत्र कह सकते हैं| यही वो झुकाव है जिससे भारत मे भूराजनीतिक विवादो को न्यौता मिल रहा है जो भारत को दूसरे देशो के साथ और ज्यादा विवादो मे घसीट रहा है| सही शब्दो मे इसी “वैश्विक नियंत्रण के लिये लडाई” को दूसरे देशो मे फैलने से रोकने के लिये ही Non Alignment Movement (NAM) का गठन हुआ था| भारत ऐतिहासिक रूप से NAM का फाउंडर रहा है और तीसरी दुनिया के देशो को नेतृत्व देकर इसे अपने आप मे एक शक्ति बनाया था| परंतु भारत ने वेंजुएला मे हुये पिछले NAM सम्मेलन मे ना जाकर एक बडे बदलाव का संकेत दिया है| ये 1979, जब कार्यवाहक प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह हवाना मे हुये सम्मेलन मे शामिल नही हुये थे, के बाद पहला NAM सम्मेलन था जिसमे भारत के पीएम शामिल नही हुये|

फिर भी, अब भी, बहुत देर नही हुई है और इस संकट से उबरे विश्व मे दुनिया के तमाम देश अब भी भारत की तरफ नेतृत्व के लिये देख रहे हैं| बस एक ही सवाल है कि भारत का नेतृत्व कौन करेगा?


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For more than 2000 years a war is being waged for the control of India and the access routes connected to it. The Turkey Coup is the beginning of the end of the Great Game, as it is known. With Russia slipping out of their hands, the eyes were set on an unfathomably resource-rich country, which even after thousand years of non-stop plunder and looting still captures the imagination of one and all, thugs, thieves and robber-barons alike with her yet-unknown massive economic resources potential — that country is India.

India in Cognitive Dissonance is a hard-hitting myth-buster from GreatGameIndiaA timely reminder for the decadent Indian society; a masterpiece on Geopolitics and International Relations from an Indian perspective – it lays bare the hypocrisy taken root in the Indian psyche because of the falsehoods that Indian society has come to accept as eternal truth.

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