कल से ही संसद के बाहर अद्वितीय प्रवचन देख और सुन रहा हूँ, सब लोग मोदी जी और राहुल जी की बातों का, उनके गले मिलने का और कान में किये गये ख़ुसुर–फुसुर का अपने–अपने तरीके से खूब मजा ले ले के बखान कर रहे हैं| लोग पप्पू और गप्पू टाइप संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण का इस्तेमाल कर-कर के खूब कहानी और जोक भी बना रहे हैं| लेकिन इन सब में एक दिलचस्प चीज ऐसी है जो शायद किसी ने नोटिस नही की या मजा लेने के चक्कर में भूल गये| जिस चीज का जिक्र करते हुए राहुल जी ने सदन में अपने भाषण की शुरुवात की| राहुल जी के कथनानुसार, पता नही कहाँ से फ़ोन आया और क्या मेसेज आया कि आनन-फानन में ही मोदी जी ने तुरन्त रातों-रात नोटबंदी की घोषणा कर दी|

कल सदन में उठाए गये सारे मुद्दे ही अति महत्व-पूर्ण थे, लेकिन एक बात जो हमारे हलक से नीचे नही उतर रही, वो ये की नोटबंदी का इतना महत्वपूर्ण मुद्दा राहुल जी ने उठाया तो, लेकिन वो भी सिर्फ एक लाइन? वो इससे क्या साबित करना चाहते थे? क्या उनकों नोटबंदी में हुए साजिश का एहसास नही है? या एहसास होते हुए भी वो मौन ही रहना पसन्द कर रहें हैं? क्यूँ वो खुले मंच पे DeLaRue का का नाम नही ले रहें है? क्या उनको कोई डर सता रहा है?

यूँ तो उनके बुजुर्गों ने हमे एक बहुत ही शानदार इतिहास दिया है, जिसपे जितना फ़ख्र किया जाए उतना कम है। लेकिन वो अपनी आने वाली नस्लो और अपने हमसफ़र देशवासियों के लिए क्या मिशाल बना रहे हैं? मोदी जी से उनका गले मिलना गांधीवादी राजनीति से बहुत ही अच्छा संकेत है| लेकिन गले मिलने के बाद उनका यूँ आंख मारना क्या भारतीय राजनीती के दोहरे रूप को प्रदर्शित नही करता? दूसरी तरफ आपको नही लगता जब राहुल जी मोदी जी को गले लगा रहे थे तब उनको भी उसी विनम्रता से मिलना चहिए था? लेकिन श्री नरेंद्र मोदी जी का कुर्सी से ना उठाना और बैठे-बैठे ही राहुल जी से गले मिलना, कुर्सी का अहंकार नहीं दिखाता है? क्या तहजीब, तमीज़, अदब और सलीका धीरे-धीरे ये शब्द महज किताबी भाषा बन के सिमटती जा रही है?

खैर राहुल गाँधी द्वारा एक लाइन में ही उठाये गये इस सवाल ने कई सारे और भी सवाल खड़े कर दिए हैं| कि सरकार द्वारा आतंकवाद की फंडिंग और विध्वंसक गतिविधियां जैसे जासूसी, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और प्रतिबंधित वस्तुओं की कालाबाजारी को रोकने के नाम पर हुई इस नोटबंदी का असली मकसद कहीं कुछ और तो नहीं? और अगर नही तो क्यूँ पूरी सरकार और विपक्ष इस नोटबंदी के खेल के पीछे के मुख्य कलाकार Delarue का नाम लेने इतना खौफ़ खा रही है?

अगर आप लोग ये भूल रहे हैं की Delarue कौन हैं, तो हम यहाँ यह बता दें की ये यही कालीसूची में डाली हुई ब्रिटिश कम्पनी है जिसको इस नोटबंदी के दौरान भारत का नोट छापने का ठेका दिया गया था| जिसको की यू पी ए की सरकार में कालीसूची में भी डाल दिया गया था| हालाँकि डेलारु पर से प्रतिबन्ध हटाने और कालीसूची से नाम हटाने के सम्बन्ध में कोई आधिकारिक घोषणा (समाचार रिपोर्ट के अलावा) नहीं की गयी है| यहाँ पे एक महत्त्वपूर्ण सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिर यह सवाल राहुल जी ने क्यूँ नही उठाया की Delarue को काली सूची से किसने हटाया? किसके आदेश पर आम जनता को इन सारे मुद्दों से गुमराह किया जा रहा है?

यही सवाल GreatGameIndia ने उठाया था, जिसके कारण हौसंगाबाद कोर्ट में Delarue के ऊपर 11 करोड़ का केस चल रहा है| यह केस de la rue के खिलाफ ख़राब पेपर क्वालिटी के वजह से चल रहा है| जोकी नकली नोटों का सबसे बड़ा सोर्स है| यही ख़राब क्वालिटी के पेपर जो Delarue ने नोट छापने के लिए आर. बी. आई. को सप्लाई किया था| वही पेपर Delarue ने पाकिस्तान को भी सप्लाई किया| जिसके कारण Delarue को काली सूची में डाल दिया गया| जब ये सवाल GreatGameIndia ने उठाया तो पूरे देश में हंगामा सा मच गया| वित्त मंत्रालय, आर.बी.आई. से लेके दुसरे मंत्रालय भी बयान देने लगे की ऐसा कोई भी ठेका Delarue को नही दिया गया था|

यही नही खुद Delarue ने GreatGameIndia को इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के कारण लीगल नोटिस भेजा| शाम तक ये नोटिस मीडिया को भी भेज दिया, ताकि कोई ये ख़बर ना छापे| इस धमकी के बाद Delarue के ख़िलाफ़ नाही मीडिया में कोई रिपोर्ट आई और नाही किसी नेता ने इसका जिक्र करने की हिम्मत की|

यहाँ पे दो बड़े मुद्दों पे आप लोगों का ध्यान खीचने की जरूरत है| क्यूंकि ये दोनों ही हमारे देश के बहुत महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं लेकिन इन दोनों की कड़ी एक ही जगह जाके जुडती है|

1 नोटबंदी
2 मठ-मन्दिरों की जायजात की महालूट

दोनों ही घटनाएँ ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे के भारत आने के साथ जुड़ी हुई हैं| नोटबंदी के तीन दिन पहले से थेरेसा मे भारत सरकार की अधिकारिक मेहमान थी| दिल्ली में उनके लिए एक बड़ा इवेंट भी ऑर्गेनाइज किया गया| जिसको स्पोंसर करने वाला कोई और नही वही काली सूची में डाली हुई कम्पनी Delarue ही थी| यही नही थेरेसा मे को सोमेश्वर मन्दिर में भी ले जाया गया| जहाँ उनकी आरती उतारी गयी और फूल मालाएँ पहनाई गयी| यहाँ तक की साक्षात माँ दुर्गा की तरह उनकी अगवानी की गयी|

आखिर क्यूँ थेरेसा मे को साक्षात दुर्गा माता की तरह सम्मानित किया गया? जब प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी का पुरी के जगन्नाथ मन्दिर में पूजा करने का कार्यक्रम था, तब उनको यह कहकर मन्दिर में प्रवेश से वंचित किया गया की वो हिन्दू नही हैं| तो क्या यह मान लिया जाए की थेरेसा मे ने धर्म परिवर्तन कर लिया है? या फिर यह समझा जाए की हमारे मठाधीश चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के मार्गदर्शन में हमारे मठ-मंदिरों का नियन्त्रण करेंगे? और अगर ऐसा नही है तो ये सवाल क्यूँ कोई नही उठा रहा की हमारे मंदिरों का खजाना और मूर्तियाँ विश्व-विख्यात ब्रिटिश नीलामी घरों में कैसे बिक रही हैं?

चालाकी से मठ-मंदिरों की सम्पत्ति हड़पने का यह खेल और नोटबंदी दोनों बहुत बड़ी साजिश है। कोहिनूर से शुरू होने वाले गोलकुंडा और वेस्टर्न घाट के बहुमूल्य रत्नों की लंबी सूची है। इस अपराध का सही आंकलन कर इसमें संलिप्त दोषियों को सामने लाने की जरूरत है। देश का दुर्भाग्य है कि इन दोनों मुद्दे पर बयानवीरों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है। लेकिन यह सारे सवाल ये बयानवीर संसद में उठाने से क्यूँ कतरा रहे हैं? इसमें मशगूल नेतागण यह भूल रहे हैं कि इस सम्पत्ति का वास्तविक मालिक भारत की आम जनता है। प्रशासन का रूख हैरत में डालने वाला है। चुनावों का सामना करने के लिए बाध्य सरकारों के सामने आज यह चुनौती सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। इन दोनों मुद्दों पर (नोट छपने का रहस्यमयी कारोबार और मठ-मंदिरों की महालूट) GreatGameIndia ने विस्तार पूर्वक रिसर्च करके हमारे प्रधानमन्त्री को अवगत कराया है| लेकिन अब तक प्रशासन की तरफ से इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम नही उठाए गये है| अगर इन मुद्दों पर सरकार कोई ठोस कार्यवाही करती है तो GreatGameIndia टीम को मदद करने में काफी खुशी होगी|

शेली कस्ली ओर हेमन्त पान्डे

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Shelley Kasli
Shelley Kasli is the Co-founder and Editor at GreatGameIndia, a quarterly journal on geopolitics and international affairs. He can be reached at shelley.kasli@greatgameindia.com