Read this report in English: Gujarat Riots – The Foreign Hand

श्री जैक स्टॉकवेल जो कि साल्ट लेक सिटी, ऊटा, अमेरिका मे के-टाक मे प्रभात रेडियो मेजबान के तौर पर कार्य करते हैं के द्वारा श्री लिंडन एच. लाराउशे का 5 मार्च 2002 को लिये गये इंटरव्यू से एक उद्धरण प्रस्तुत है| लिंडन हरमायली लाराउशे जूनियर एक अमेरिकी राज्नीतिक एक्टिविस्ट और नेशनल कॉकस ऑफ लेबर कमेटी के संस्थापक हैं| एक समय वो 1976-2004 के दौरान सभी राष्ट्रपति चुनावों मे अपनी पार्टी यू.एस. लेबर पार्टी के कैंडीडेट रह चुके हैं|

जब उनसे गुजरात दंगो के बारे मे सवाल किया गया तो उन्होने इस पूरी घटना मे विदेशी हाथ होने का उजागर कर दिया| भारत मे इस तरह का विमर्श कभी नही हुआ, और इसके लिये खुद से पूंछिये कि आखिर क्यों?


खैर, पहली बात तो ये है कि भारत को निशाना बनाने के लिये ऐसे आपरेशन जैसे कि गुजरात मे हुआ धार्मिक टकराव, 1988 मे अमेरिका मे एक वर्ग के द्वारा किया जाता था| केटो संस्थान के लोग ऐसे समूहो मे स्थान रखते हैं जिन्होने ऐसी नीतियाँ बनाई| जो भारत को अमेरिका के मुख्य शत्रु के तौर पर लक्ष्य बनाकर थी| खासकर उस आधार पर, रूस के प्राइम मिनिस्टर येवगेनी प्राइमाकोव ने अपने दिल्ली मे नवम्बर मे दिये भाषण मे एक प्रस्ताव दिया| जिसमे रूस, चीन, और इंडिया को मिलाकर एक स्ट्रेटजिक भागीदारी, एक ऐसा त्रिकोणीय ट्राइएंगल बनाने की सलाह थी, जो सहयोग को उस स्तर तक बढाये जो समस्त यूरेशिया को करीब लाकर एक को-आपरेटिव फार्मेशन बनाने के लिये जरूरी हो|

इसकी प्रतिक्रिया मे रैंड कार्पोरेशन, कैटो इंस्टीच्यूट और इन जैसे अन्य लोगो की राय थी कि भारत को रणनीतिक विनाश का मूल लक्ष्य बनाया जाय| इस चीज का दूसरा चरण जो निश्चय ही सरकार के हावर्ड विभाग से ही फिर आया| जो कि निश्चय ही सैमुअल हंटिंग्टन, जिग्निउ ब्रेजिंस्की, हेनरी किसिंगर और नैशविले एग्रेरियन विचारधारा के अन्य लोगो का पुराना केंद्र रहा है| फिर से इसका मकसद सभ्यताओ को लडाने का था| जो हम गुजरात, भारत मे देख रहे हैं वो पूरी तरह एंग्लो अमेरिकन द्वारा निर्देशित आयोजन हैं, खुफिया इंटेलीजेंस और विशेष हथियारो के इस्तेमाल से की गई एक ऐसी घटना जिसका मकसद भारत मे भिन्न-भिन्न सभ्यताओ के धार्मिक टकराव द्वारा आपसे मे लड़ाकर भारत को अंदर से बरबाद करना था| और अगर आप कैटो इंस्टीच्यूट संस्थान के शब्दो पर ध्यान दे, तो आप 1998 के आखिर मे बिल्कुल ऐसी ही नीति पायेंगे| जब आप सभ्यताओ के टकराव की रोशनी मे कैटो और रैंड कार्पोरेशन के स्टडी को पढते हैं तो आपको ये बहुत ही स्पष्ट नजर आता है|

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GGI News Staff
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